; स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना पर सख्त हुआ वन विभाग 30 सितंबर तक हर हाल में आदेशों का पालन करने के निर्देश, लापरवाही पर वेतन रोकने और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी - Navyug Pathik

 

देहरादून। वन विभाग में जून 2026 में बड़ी संख्या में रेंजर, डिप्टी रेंजर, वन दरोगा, वन आरक्षी एवं मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे। अब इन आदेशों को जारी हुए ढाई से तीन महीने का समय बीतने को है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी अभी तक अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि इनमें कई कार्मिक लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं और स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी अपने पुराने तैनाती स्थल पर बने हुए हैं।

स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन आदेशों के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात रहने का क्या कारण है? एक ही जगह पर लंबे समय से बने रहने के पीछे क्या कोई विशेष लाभ है? क्या उस स्थान पर तैनाती उनके लिए किसी तरह के आर्थिक अथवा अन्य लाभ से जुड़ी हुई है, जिसके कारण वे स्थानांतरण आदेश के बावजूद वहां से हटना नहीं चाहते?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर किसके संरक्षण में अधिकारी-कर्मचारी स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं? यदि विभागीय स्तर पर आदेश जारी हो चुके हैं तो संबंधित कार्मिक को तत्काल नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करना चाहिए था।

इसी मामले को लेकर HoFF के समक्ष शिकायतें सामने आने के बाद प्रकरण उनके संज्ञान में लाया गया। HoFF ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्थानांतरण आदेशों की पालना हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी। जो भी अधिकारी-कर्मचारी जारी आदेशों की पालना नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का वेतन भी रोका जाएगा। साथ ही स्पष्ट किया गया कि किसी भी कार्मिक को किसी भी परिस्थिति में एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा।

HoFF ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी DFO/DDO के संरक्षण अथवा स्तर से स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं हो रही है, तो ऐसे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

HoFF ने स्थानांतरण आदेशों की पालना के लिए 30 सितंबर की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। इसके बाद भी यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी पुराने तैनाती स्थल पर बना रहता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

देखने वाली बात यह होगी कि 30 सितंबर के बाद विभाग लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे तथा स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है।

By NewsDesk Navyug Pathik

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