
उत्तरकाशी जनपद के मोरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत फ़िताडी के अंतर्गत जाखा खड्ड से लगी हुई, क्यारा तोक क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि पर भूस्खलन का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रहे भारी भूस्खलन और बरसाती गदेरों के कारण खेती योग्य भूमि का तीव्र कटाव हो रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट गहराता जा रहाहै।इसी बीच इस पूरे मामले में एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रखंड प्रभारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट अमीन सिंह राणा द्वारा सिंचाई विभाग में दाखिल आरटीआई के माध्यम से बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर सूचना मांगी गई थी।प्राप्त दस्तावेजों और सूचनाओं के अनुसार, जिन कार्यों को कागजों में बड़े स्तर पर दर्शाया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति धरातल पर बेहद चिंताजनक और संदिग्ध पाई गई। आरटीआई से मिले तथ्यों ने यह संकेत दिया है कि बाढ़ सुरक्षा के नाम पर स्वीकृत योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमिताएं हुई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये के एस्टीमेट तैयार किए जाते हैं, शासन स्तर से बजट स्वीकृत करवाए जाते हैं, लेकिन उसके बाद जनता के टैक्स के पैसों के दुरूपयोग का जो नंगा नाच शुरू होता है,वो अत्यंत चिंताजनक है। यही नहीं जिन स्थानों पर वास्तविक सुरक्षात्मक कार्यों की आवश्यकता थी, वहां आज तक कोई ठोस कार्य नहीं किया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से स्थायी बाढ़ सुरक्षा और भूमि संरक्षण कार्य शुरू किए जाएं।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जाखा खड्ड के कारण,क्यारा तोक की संपूर्ण कृषि भूमि भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो सकती है, जिससे क्षेत्र में व्यापक आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न होने की आशंका है।
