देहरादून। चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र में हाल ही में हुए हिंसक विवाद के बाद, और बीते दो दिन पूर्व उत्तराखंड -हिमाचल बॉर्डर पोंटा साहिब के पास उत्तराखंड पुलिस और निहंग सिखों के बीच हुई झड़प के बाद उत्तराखंड सरकार के द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मामले में दर्ज मुकदमों और तनावपूर्ण स्थिति के बीच अब प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार के एसपी नवनीत सिंह भुल्लर को वार्ता प्रक्रिया के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी देखरेख में प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, ताकि पूरे मामले का समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से निकाला जा सके।
गौरतलब है कि कर्णप्रयाग में हुए विवाद के दौरान कथित रूप से धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। इस घटना में एक स्थानीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके शरीर पर कई टांके लगाए गए। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद हेली एम्बुलेंस के माध्यम से देहरादून के मैक्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार किया गया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।इधर, निहंग प्रतिनिधियों की ओर से गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग उठाई गई। निहंग पक्ष ने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया तो वे कर्णप्रयाग की ओर कूच करेंगे। इसी इनपुट के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए।
उत्तराखंड सरकार ने हिमाचल प्रदेश से लगने वाली पांवटा साहिब सीमा पर पुलिस, पीएसी और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर बैरिकेडिंग की। सीमा पर आने-जाने वाले वाहनों की जांच की गई और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहीं।पांवटा साहिब क्षेत्र में बैरिकेडिंग के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। पुलिस के अनुसार, इस दौरान पथराव और धक्का-मुक्की की घटनाएं हुईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान किया जाता है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है। किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि पूरे मामले का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया, संवाद और कानून के दायरे में ही निकाला जाएगा।
प्रशासन ने लोगों से भी अफवाहों से बचने, शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी साझा न करने की अपील की है। राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की शांति, सामाजिक सौहार्द और आंतरिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
